सेवा (#14352)

हे ईश्वर और समस्त नामों के ईश्वर और आसमानों के निर्माता! मैं तेरे उस नाम से तुझ से विनती करता हूँ, जिसके द्वारा, वह जो तेरे सामर्थ्‍य का उद्गमस्थल और तेरी शक्ति का उदयस्थल है, प्रकट हुआ है, जिसके द्वारा प्रत्येक ठोस वस्तु को प्रवाहमान किया गया है और प्रत्येक मृत शरीर को जीवित किया गया है और प्रत्येक गतिमान चेतना की सम्पुष्टि की गई है - मैं तुझसे विनती करता हूँ कि तेरे अतिरिक्त, मुझे हर प्रकार की आसक्ति से छुटकारा पाने, तेरे धर्म की सेवा करने और वह इच्छा पूरी करने के लिए, जिसकी इच्छा तूने अपनी प्रभुसत्ता की शक्ति के द्वारा की है, उस इच्छा को पूरा कर सकूँ।
इसके अतिरिक्त, हे मेरे ईश्वर, मैं तुझसे विनती करता हूँ कि मेरे लिए उसका विधान कर जो मुझे इतना सम्पन्न बना दे कि तेरे अतिरिक्त मुझे किसी अन्य की आवश्यकता न रहे। हे ईश्वर, तू मुझे देख रहा है कि मैं तेरी ओर उन्मुख हूँ, और मेरे हाथ तेरी कृपा की डोर को थामे हुए हैं। मुझ पर अपनी दया भेज और मेरे लिए वह लिख दे जो तूने अपने चुने हुए लोगों के लिए लिखा है। तू जो चाहे वह करने में समर्थ है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, सदा क्षमाशील, सर्वउदार।

-Bahá'u'lláh
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सेवा (#14353)

मैं तेरी स्तुति करता हूँ, हे मेरे ईश्वर कि तेरी स्नेहमयी कृपा की सुगंध ने मुझे आनंदविभोर कर दिया है, तेरी दया की मंद समीरों ने मुझे तेरे उदारतापूर्ण अनुग्रह की ओर प्रवृत्त किया है। हे मेरे स्वामी, अपनी मुक्तहस्तता की उँगलियों से उस जीवन जल का जिसने प्रत्येक को, जिसने उसे ग्रहण किया है, समर्थ बनाया है, तेरे अतिरिक्त सभी आसक्तियों से छुटकारा दिलाने के लिए और तेरी समस्त प्राणियों से अनासक्ति के वातावरण में उड़ान भरने के लिए और तेरे बहुविध उपहारों और तेरी स्नेहमयी कल्याण भावना पर दृष्टि जमाने के लिए, मुझे एक घूँट पिला दे।
हे मेरे स्वामी, हर परिस्थिति में तेरी सेवा करने और तेरे प्रकटीकरण एवं सौंदर्य के आराध्य मंदिर की ओर अग्रसर होने मे मुझे तत्पर रख। अगर यह तेरी इच्छा हो तो अपनी कृपा के चारागाह में मुझे पर एक कोमल शाख की भाँति बहने दे, ताकि तेरी इच्छा की मंद समीरे मुझे तेरी प्रसन्नता के अनुरूप इस प्रकार स्पंदित करें कि मेरी गतिमानता और निश्चलता पूर्णतया तेरे द्वारा संचालित हो।
तू वह है जिसके नाम से निगूढ़ रहस्य प्रकट हुए और संरक्षित नाम उद्घाटित हुआ और मोहरबंद प्याले की मोहरें खोली गईं, समस्त सृष्टि पर, चाहे भूत की हो या भविष्य की, इसकी सुगंध बिखेरी गयी। वह जो प्यासा था, हे मेरे स्वामी, तेरी कृपा के जीवंतजल की प्राप्ति के लिए दौड़ पड़ा है और भाग्यहीन प्राणी ने तेरी समृद्धि के महासागर की तलहटी में स्वयं को डुबाने की लालसा की है।
मैं तेरी महिमा की सौगंध खाता हूँ, हे जगत के प्रिय स्वामी और उन सभी की कामना, जिन्होंने तुझे पहचाना है। मैं अत्यधिक दुःखी हूँ तुझसे अपने वियोग की पीड़ा से उन दिनों में जब तेरी उपस्थिति के सूर्य ने तेरे जनों पर अपनी प्रभा बिखेरी है। तब मेरे लिए वह पुरस्कार लिख दे जो उनके लिए आदेशित है जिन्होंने तेरे मुखड़े को एकटक निहारा है, और तेरी अनुमति से तेरे सिंहासन के प्रांगण में प्रवेश प्राप्त किया है और तेरे आदेश से तुझसे मिलन किया हैं।
मैं याचना करता हूँ तुझसे, हे मेरे स्वामी, तेरे उस नाम के द्वारा जिसकी भव्यता ने धरती और आकाश को आवृत किया है, कि मुझे शक्ति दे कि मैं अपनी इच्छा को, जो कुछ तूने अपनी पातियों में आदेशित किया है, समर्पित कर दूँ ताकि मैं अपने अंदर कोई भी इच्छा न खोज सकूँ सिवा उसके जो अपनी प्रभुसत्ता की शक्ति द्वारा अपनी इच्छा से तूने मेरे लिए नियत की है।
मैं किस ओर उन्मुख होऊँ, हे मेरे ईश्वर, उस मार्ग के अतिरिक्त जिसे तूने अपने चुने हुये जनों के लिए निर्धारित किया है, मैं किसी अन्य मार्ग को खोज पाने में असमर्थ हूँ। पृथ्वी के सभी परमाणु उद्घोषित करते हैं, कि तू ईश्वर है और साक्ष्य देते हैं कि तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं। तू अनादिकाल से वह करने में जिसकी तूने इच्छा की, और वह आदेशित करने में जिसे तूने चाहा है समर्थ रहा है।
क्या तू मेरे लिए वह नियत करेगा हे मेरे ईश्वर, जो हर हाल में मुझे तेरी ओर अग्रसर करे और मुझे तेरी कृपा की डोर से बंधे होने, तेरे नाम की उद्घोषणा करने और जो कुछ तेरी लेखनी से प्रवाहमान हुआ है उसे खोजने के योग्य बनाये। मैं भाग्यहीन और अकेला हूँ, हे मेरे ईश्वर और तू सर्वसम्पन्न, सर्वउदात्त है।
मुझ पर दया कर, अपनी करूणा के आश्चर्यों द्वारा और मेरे जीवन में प्रति क्षण, उन वस्तुओं को भेज जिनके द्वारा तूने अपने प्राणियों के हृदयों की पुनर्रचना की है, जिन्होंने तेरी एकता में विश्वास किया है और वे समस्त प्राणी जो पूर्णरूप से तुझे समर्पित हैं।
तू सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, सर्वउदात्त, सर्वज्ञाता, सर्वज्ञ है।

-Bahá'u'lláh
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