सभाएँ (#8697)

महिमावंत है तू हे मेरे स्वामी, मेरे ईश्वर! तेरी कृपा के पवन झकोरों के नाम से और उनके नाम से जो तेरे उद्देश्य के दिवानक्षत्र और तेरी प्रेरणा के उद्गम हैं, मैं याचना करता हूं कि मुझ पर और उन सब पर, जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं, वह भेज जो तेरी उदारता और आशीषयुक्त कृपा के समीचीन हो और तेरे वरदानों और अनुग्रह के अनुकूल हो। मैं एकाकी और दीन हूँ, हे मेरे स्वामी! अपनी सम्पदा के सागर में मुझे निमग्न कर ले, प्यासा हूँ, अपनी स्नेहिल कृपा के जीवन-जल का पान करने दे। 
तेरे ही नाम से और उसके नाम से जिसे तूने अपने अस्तित्व का प्रकटरूप बनाया है और आकाश तथा धरती पर जो भी हैं उन्हें अपने दिव्य शब्द का बोध कराया है, मैं याचना करता हूँ कि अपने विधान के वृक्ष की छाया तले अपने सेवकों को एकत्र कर और तब इसके मधुर फल का स्वाद लेने दे, इसके पत्तों के स्पंदन से उत्पन्न होने वाले सुमधुर स्वर को समझने और इसकी शाखाओं पर चहकने वाले दिव्य पक्षी के कलरव को सुनने के योग्य बना। तू सत्य ही, संकट में सहायक, पहुँच से परे, सर्वशक्तिशाली और परम कृपालु है।

-Bahá'u'lláh
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सभाएँ (#8702)

हे तू दयालु ईश्वर! ये तेरे सेवक हैं जो इस सभा में एकत्रित हुए हैं, तेरे साम्राज्य की ओर उन्मुख हैं और तेरे उपहार तथा आशीर्वाद की कामना करते हैं। हे ईश्वर जीवन के यथार्थ में निहित एकता के अपने चिन्हों को प्रमाणित और प्रकट कर। उन गुणों को प्रकट और प्रत्यक्ष कर जो मानवीय यथार्थों में अप्रकट तथा गुप्त रखे गये हैं।
हे ईश्वर, हम पौधों की भाँति हैं और तेरी कृपा वर्षा के समान है। इन पौधों को नवस्फूर्ति प्रदान कर, इन्हें अपने आशीष से विकसित कर। हम तेरे सेवक हैं, हमें भौतिक अस्तित्व की बेड़ियों से मुक्त कर। हम अज्ञानी है, हमें ज्ञानी बना। हम मृत हैं, हमें जीवन दे। हम जड़ हैं, हमें चैतन्य बना। हम वंचित हैं, हमें अपने रहस्यों का बोध करा। हम दीन हैं, हमें अपने असीम कोष से समृद्धि और आशीष प्रदान कर।
हे ईश्वर, हमें पुनर्जीवित कर, दृष्टि तथा श्रवण शक्ति प्रदान कर, जीवन के रहस्यों से परिचित करा, ताकि अस्तित्व के प्रत्येक लोक में तेरे साम्राज्य के रहस्य हम पर प्रकट हों और हम तेरी एकमेवता के साक्षी बन सकें। तू ही प्रत्येक कृपा का स्रोत है। तू समर्थ, शक्तिसम्पन्न, दाता, सदा कृपालु है।

-`Abdu'l-Bahá
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सभाएँ (#8701)

हे तू कृपालु ईश्वर! हे तू, जो समर्थ और शक्तिशाली है। हे तू परम दयालु पिता! ये सेवक तेरी ओर उन्मुख होकर, तेरी पावन देहरी का स्मरण करते हुए और तेरे महान आश्वासन की अनन्त कृपा की कामना करते हुए एकत्रित हुए हैं। तुम्हारी सुप्रसन्नता के अतिरिक्त इनका और कोई उद्देश्य नहीं है। मानव-सेवा के अतिरिक्त इनका और कोई उद्देश्य नहीं है।
हे ईश्वर! इस सभा को दीप्त कर। इनके हृदयों को दयावान बना। पावन चेतना के आशीष इन्हें प्रदान कर। दिव्य शक्ति से इन्हें विभूषित कर। इन्हें दिव्य विवेक का आशीष दे। इनकी निष्ठा बढ़ा ताकि पूर्ण विनम्रता और सम्पूर्ण समर्पण की भावना के साथ ये तेरे साम्राज्य की ओर उन्मुख हो सकें और मानव-सेवा में लगे रहें। इनमें से प्रत्येक प्रकाशित दीप बने। इनमें से प्रत्येक जगमगाता सितारा बने। इनमें से प्रत्येक ईश्वर के साम्राज्य के सुन्दर रंग और सुरभि के संवाहक बनें।
हे दयालु पिता! अपने आशीष भेज। हमारे दोषों को न देख। अपनी सुरक्षा में हमें आश्रय दे। हमारे पापों को क्षमा कर। अपनी कृपा से हमें आरोग्य प्रदान कर। हम शक्तिविहीन हैं, तू शक्तिशाली है। हम दरिद्र हैं, तू सम्पन्न हैं ! हम रोगग्रस्त हैं, तू  दिव्य चिकित्सक है! हम आवश्कताग्रस्त हैं, तू  परम उदार है!
हे ईश्वर ! अपने मंगलविधान से हमें विभूषित कर। तू शक्तिशाली है ! तू कल्याणकारी है ! तू  दाता है!

-`Abdu'l-Bahá
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सभाएँ (#8700)

हे मेरे ईश्वर! हे मेरे ईश्वर! सत्य ही, ये सेवक तेरी ओर उन्मुख हो रहे हैं, तेरी दया के साम्राज्य की याचना कर रहे हैं। सत्य ही ये तेरी पावनता के प्रति आकर्षित हुए हैं और तेरे प्रेम की ज्वाला से दीप्त हो उठे हैं, तेरे महिमामय लोक की दया की कामना कर रहे हैं और तेरे दिव्य साम्राज्य में प्रवेश पाने की आशा रखते हैं। सत्य ही, ये तेरे आशीषों की वर्षा की कामना करते हैं और सत्य सूर्य से प्रकाशित होने की इच्छा रखते हैं। हे ईश्वर, इन्हें देदीप्यमान दीपक बना दे। ऐसा वर दे कि ये तेरे योग्य बन सकें, तेरे प्रेम की डोर से बंध सकें और तेरी अनुकम्पा का प्रकाश पा सकें। हे स्वामी ! इन्हें मार्गदर्शन के चिन्ह बना, अपने शाश्वत साम्राज्य का आदर्श प्रतिरूप बना, अपने कृपासागर की उत्ताल तरंगें बना, अपनी भव्यता के प्रकाश को प्रतिबिम्बित करने वाला दर्पण बना। 
सत्य ही, तू उदार, दयामय, अनमोल, परम प्रियतम है।

-`Abdu'l-Bahá
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सभाएँ (#8699)

हे तू क्षमाशील स्वामी ! तेरे ये सेवक, तेरे साम्राज्य की ओर उन्मुख हो रहे हैं और तेरी अनुकम्पा और दया की कामना कर रहे हैं। हे ईश्वर, इनके हृदयों को निर्मल और पावन कर दे ताकि ये तेरे प्रेम के योग्य बन सकें। इनकी चेतना को शुद्ध एवं पवित्र कर दे ताकि सत्य सूर्य का प्रकाश इनमें चमक सके। इनके नेत्र इस योग्य बना दे कि ये तेरे प्रकाश का अवलोकन कर सकें, इन्हें अपने साम्राज्य की पुकार सुनने के योग्य बना दे। 
हे स्वामी, यह सत्य है कि हम दीन-हीन हैं, लेकिन तू तो सर्वसम्पन्न है। हम याचक हैं, तू वह है जिसकी याचना सभी करते हैं। हे स्वामी! हम पर दया कर, हमें क्षमा कर दे, हमें ऐसी शक्ति और सामर्थ्‍य दे कि हम तेरी अनुकम्पाओं के योग्य बन सकें और तेरे साम्राज्य की ओर आकर्षित हो सकें, ताकि हम जी भरकर कर जीवन-जल का पान सकें, तेरे प्रेम की ज्वाला से प्रदीप्त हो उठें और इस प्रकाश से भरे दिवस में पावन चेतना की सांसों के सहारे पुनर्जीवित हो उठें।
हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! इस सभा पर अपनी प्रेम भरी कृपालुता की दृष्टि डाल। इनमें से प्रत्येक को अपना संरक्षण प्रदान कर, अपने अधीन रख। अपने दिव्य आशीष इन्हें प्रदान कर। इन्हें अपने कृपासागर में निमग्न कर दे और अपनी पावन चेतना की सांसों द्वारा इन्हें नवजीवन प्रदान कर।
हे स्वामी! इस न्यायसंगत सभा को अपनी अनुकम्पायुक्त सहायता प्रदान कर, अपने आशीषों से सम्पुष्ट कर। ये राष्ट्र तेरे संरक्षण की आश्रय दायिनी छाया तले हैं और ये लोग तेरी ही सेवा में संलग्न हैं। हे स्वामी! इन्हें अपने दिव्य आशीष प्रदान कर और अपनी भरपूर अनुकम्पा से इन्हें भर दे। अपने साम्राज्य में इन्हें स्वीकारे जाने योग्य बना। तू शक्तिशाली, सर्वसमर्थ, दयालु और भरपूर अनुकम्पा का स्वामी है।

-`Abdu'l-Bahá
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सभाएँ (#8698)

हे दिव्य विधाता! यह सभा तेरे उन सहचरों की है, जो तेरे सौन्दर्य के प्रति आकर्षित हुए हैं और जिनके अंतर्तम में तेरे प्रेम की ज्वाला धधक रही है। इन आत्माओं को स्वर्गिक देवदूत जैसा बना दे, नवजीवन दे कर इन्हें अपनी पावन चेतना से प्रखर कर, इनकी वाणी को ओज प्रदान कर, इन्हें संकल्प भरे हृदय दे, इन्हें दिव्य शक्ति से इस योग्य बना कि ये तेरी कृपा का भाग ग्रहण कर सकें, इन्हें मानवजाति की एकता का प्रवर्तक बना और मानव-संसार में प्रेम और मैत्री का संवाहक बना, ताकि सत्य के सूर्य के प्रकाश से ज्ञानविहीन पूर्वाग्रह का घातक अंधकार दूर हो सके, शोक-संतापों से भरा यह संसार ज्ञान के प्रकाश से दीप्त हो उठे और यह भौतिक जगत अपने में आध्यात्मिक लोक की किरणें समाहित कर ले, विविध रंग मिलकर एक रंग हो जायें और इनके द्वारा की गई प्रार्थना का स्वर माधुर्य तेरी पावनता के साम्राज्य तक पहुँच सके। सत्य ही, तू सर्वसमर्थ और सर्वशक्तिशाली है।

-`Abdu'l-Bahá
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