संरक्षण (#8721)

हे ईश्वर! मेरे ईश्वर! तेरे प्रेम की डोर थामे हुए मैं अपने घर से निकल पड़ा हूँ, मैंने पूरी तरह से तेरी देख-रेख और तेरे संरक्षण में स्वयं को सौंप दिया है। तेरी उस शक्ति के नाम से, जिससे तूने अपने प्रियजनों को राह भटकने और पतन से रोका है, दुराग्रही एवं अत्याचारियों से दूर रखा है और अपने से दूर भटके दुराचारियों से बचाया है, मैं याचना करता हूँ कि अपनी कृपा और अनुकम्पा से मुझे सुरक्षित रख। अपनी शक्ति और सामर्थ्‍य की शक्ति से मुझे अपने घर वापस लौटने में समर्थ बना। तू सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, संकट में सहायक, स्वयंजीवी है।

-Bahá'u'lláh
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संरक्षण (#8722)

स्तुति हो तेरी, हे स्वामी, मेरे ईश्वर! तू देखता है और जानता है कि मैंने तेरे सेवकों का अन्य किसी ओर नहीं, बल्कि बस तेरी कृपा की ओर उन्मुख होने का आह्वान किया है और इन्हें उन आदेशों का पालन करने को कहा है जो तेरे बोधगम्य निर्णय और अटल उद्देश्य के द्वारा भेजे गये हैं।
हे मेरे ईश्वर! जब तक तेरी आज्ञा न हो मैं एक शब्द भी नहीं बोल सकता और जब तक तेरी स्वीकृति न मिले न ही किसी भी ओर जा सकता हूँ। तू ही है मेरे ईश्वर जिसने अपनी सामर्थ्‍य की शक्ति से मुझे अस्तित्व दिया है और अपने धर्म का संदेश देने के लिये अपनी कृपा प्रदान की है। इसी कारण मुझ पर इतनी विपत्तियाँ ढ़ायी गईं हैं कि मेरी जिह्वा पर तेरा गौरवगान करने और तेरी महिमा का उद्घोष करने से रोक दी गई है।
सर्वज्ञ स्तुति हो तेरी, हे मेरे ईश्वर ! उन सब के लिये जिसका विधान अपने आदेश और अपनी सम्प्रभुता की शक्ति से तूने किया है, मैं तुझसे याचना करता हूँ कि तू मेरे और अपने प्रेमियों को अपने प्रेम को सुदृढ़ रख। तुझे तेरी सामर्थ्‍य की सौगंध, हे मेरे ईश्वर! मात्र एक पर्दे के कारण मैं तुझसे दूर होकर लज्जित हूँ। तुझे जानूं मेरा गौरव तो इसी में है। तेरे नाम की शक्ति का कवच धारण कर लेता हूँ तब कोई भी आघात चोट नहीं पहुँचा पाता और मेरे हृदय में जब तेरा प्रेम होता है तब संसार की विपदाएँ भी मुझे विचलित नहीं कर पातीं। अतः, हे मेरे ईश्वर! वर दे कि तेरे सत्य का खण्डन करने वालों और तेरे चिन्हों में अविश्वास करने वालों से मेरी रक्षा हो सके। तू ही, वस्तुतः, सर्वमहिमाशाली, सर्वकृपालु है।

-Bahá'u'lláh
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संरक्षण (#8723)

महिमावंत हो तेरा नाम, हे मेरे ईश्वर! तेरे उस नाम के सहारे, जिसके द्वारा काल ठहर गया था, पुनर्जीवन सम्भव हुआ था और धरती तथा आकाश के सभी वासी भयभीत हो उठे थे, मैं याचना करता हूँ कि उन सब से, जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं और तेरे धर्म के कार्यों में संलग्न हैं, अपनी कृपा के आकाश और अपनी स्नेहिल करूणा के बादलों से वह बरसा जो उन सेवकों के हृदयों को उल्लसित कर दे। हे स्वामी! अपने सेवक और सेविकाओं को असद् आसक्ति और व्यर्थ-कल्पनाओं की पीड़ा से बचा और अपने ज्ञान की निर्मल जलधार से एक घूंट पीने की अनुकम्पा प्रदान कर। तू, सत्य ही, सर्वशक्तिमान, परम उदात्त, सदा क्षमाशील, और परम उदार है।

-Bahá'u'lláh
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संरक्षण (#8724)

हे मेरे स्वामी, मेरे लिये और उनके लिये जो तेरे भक्त हैं, उसका विधान कर, जिसे तूने अपने मातृग्रंथ के अनुरूप हमारे लिये सर्वोत्तम समझा हो, क्योंकि तेरी मुट्ठी में सभी वस्तुओं के परिणाम बंद हैं। तेरे मंगलमय उपहार अविरल बरसते हैं उन पर सब जिन्होंने तेरे प्रेम की कामना की है। तेरी दिव्य कृपा के अद्भुत चिन्हों का भरपूर दान मिलता है उनको, जो तेरी दिव्य एकता को समझ पाये हैं। तूने हमारे लिये जो कुछ भी विधान किया है उसे हम तेरी सार-सम्भाल में अप्रित करते हैं और तुझसे विनती करते हैं कि हमको वह सब शुभ मंगल प्रदान कर जो तेरे ज्ञान की परिधि में आता है। हे मेरे स्वामी, अपनी अन्तर्दृष्टि से प्रत्येक अशुभ से मेरी रक्षा कर, क्योंकि तेरे अतिरिक्त अन्य सभी शक्तिहीन हैं और तेरे सान्निध्य के अतिरिक्त कहीं से विजय का उद्भव नहीं होता। एकमात्र तेरा ही आदेश देने का अधिकार है जो भी ईश्वर ने चाहा है, वही हुआ है और जो नहीं चाहा है वह कदापि घटित नहीं होगा। परम उदात्त, परम सामर्थ्‍यवान ईश्वर के अतिरिक्त और किसी में शक्ति और सामर्थ्‍य नहीं है।

-The Báb
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संरक्षण (#8725)

महिमा हो तेरी, हे ईश्वर! तू वह ईश्वर है जो सभी वस्‍तुओं से पहले अस्तित्व में था, जो सभी वस्तुओं के पश्चात भी अस्तित्व में रहेगा तथा सभी वस्तुओं के परे कायम रहेगा। तू वह ईश्वर है जो सब कुछ जानता है तथा सभी वस्तुओं से उच्च है। तू वह ईश्वर है जो सभी वस्तुओं से दया का व्यवहार करता है, जो सभी वस्‍तुओं के बीच न्याय करता है और जिसकी दिव्य-दृष्टि सभी वस्‍तुओं को समाये हुए है। ईश्वर तू मेरा स्वामी है, तू ही मेरी स्थिति से अवगत है, तू ही मेरे आंतरिक एवं बाह्य अस्तित्व का साक्षी है।
मुझे एवं उन अनुयायियों को, जिन्होंने तेरे आह्वान का प्रत्युत्तर दिया है, क्षमा प्रदान कर। जो कोई भी मुझे दुःख देने की इच्छा रखे अथवा मेरा बुरा चाहे उसके अनिष्ट के विरुद्ध तू मेरा पर्याप्त सहायक बन। वस्तुतः, तू समस्त सृजित वस्‍तुओं का स्वामी है। तू सभी के लिये पर्याप्त है, जबकि तेरे सिवा कोई भी स्वःनिर्भर नहीं।

-The Báb
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संरक्षण (#8726)

ईश्वर के नाम से, जो सबको वश में करने वाली भव्यता का स्वामी है, सर्वसम्मोहक है !
परम पावन वह स्वामी है, जिसके हाथ में साम्राज्य का स्रोत है। वह जो चाहता है सृजन करता है, अपने उस शब्द के माध्यम से ”हो जा“ के आदेश से और वह हो जाता है। शासन की शक्ति पहले भी उसी की थी और आगे भी उसी की रहेगी। अपने आदेश की शक्ति से वह जिसे चाहे विजयी बनाता है। सत्य ही, वह सर्वसमर्थ, सर्वशक्तिमान है। प्रकटीकरण और सृष्टि के साम्राज्य में, जो भी है और जो भी इनके मध्य है, समस्त महिमा और भव्यता उसी की है। सत्य ही, वह सर्वसमर्थ, सर्वमहिमावंत है। सदासर्वदा से वह अदम्य शक्ति का स्रोत रहा है और अनन्तकाल तक रहेगा। धरती और आकाश के समस्त लोक ईश्वर के हैं; उसकी शक्ति सर्वव्यापी है। धरती के समस्त खज़ाने और जो भी इनके मध्य है, सब उसी के हैं और उसके संरक्षण की छत्रछाया तले समस्त वस्तुओं से परे है। धरती और आसमानों का वही स्रष्टा है, और जो भी इनके मध्य स्थित है, सत्य ही, वह सर्वोपरि साक्षी है। धरती और आकाश के समस्त वासियों और जो भी इनके मध्य स्थित हैं, उन सबका वही निर्णायक है। सत्य ही, वह ईश्वर तत्क्षण निर्णय लेता है। वही है धरती और आकाश के समस्त वासियों और जो भी इनके मध्य स्थित है, उन सबके लिये अंशों का निर्धारक वस्तुतः, वही है सर्वोच्च संरक्षक; उसकी मुट्ठी में कैद हैं धरती और आकाश और जो भी इनके मध्य स्थित हैं इनके मध्य की कुंजी है। वह अपने आदेश की शक्ति के माध्यम से स्वयं अपनी ही प्रसन्नता से, उपहारों का दान देता है। वस्तुतः वह सभी कुछ का जानने वाला है और उसकी कृपा सभी कुछ को अपनी परिधि में लिये हुए है।
कहो, ईश्वर मेरा सर्वोपरि परिपूरक है, उसकी मुट्ठी में समस्त वस्तुओं का साम्राज्य कैद है। धरती और आकाश, और जो कुछ भी इनके मध्य है, उन सबकी वह रक्षा करता है। ईश्वर सत्य ही, समस्त वस्तुओं पर अपनी दृष्टि रखता है। 
हे स्वामी, तू अपरिमेय रूप से उदात्त है! हमारे समक्ष और हमारे पीछे, हमारे सिर के ऊपर, हमारे दायें और बायें, हमारे पैरों तले, और प्रत्येक उस दिशा से जिससे भी हम असुरक्षित हैं, उन सबसे हमारी रक्षा कर। वस्तुतः समस्त पदार्थों पर तेरा संरक्षण अचूक है।

-The Báb
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संरक्षण (#8727)

हे ईश्वर! मेरे ईश्वर्! अहम् और वासना की आसुरी प्रवृत्तियों से अपने सत्यनिष्ठ सेवकों की रक्षा कर, अपनी स्नेहमयी दयालुता की सदा सावधान दृष्टि द्वारा प्रत्येक विद्वेष, घृणा और ईर्ष्‍या से इन्हें बचा, अपनी सार-सम्भाल के अभेद्य दुर्ग में इन्हें आश्रय दे और संदेहों के बाणों से इनकी रक्षा कर, इन्हें अपने महिमामय चिन्हों के मूर्तरूप बना। अपनी दिव्य एकता के सूर्य से निकलने वाली दीप्तिमान किरणों से इनके मुखड़ों को आलोकित कर, अपने दिव्य साम्राज्य से प्रकट किये गये छंदों द्वारा इनके हृदयों को आनन्दित कर दे, अपने परमलोक से आने वाली सर्वसमर्थ शक्ति द्वारा इन्हें समर्थ बना।
तू सर्वप्रदाता, सर्वरक्षक, सर्वसामर्थ्‍यशाली और सर्वकृपालु है।

-`Abdu'l-Bahá
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