शिक्षण (#8683)

महिमावंत हो तेरा नाम, हे मेरे ईश्वर ! तूने उस दिवस को प्रकट किया है जो दिवसों का अधिपति है, वह दिवस जिसे तूने अपने प्रियजनों तथा दिव्य अवतरणों के समक्ष अपनी श्रेष्ठतम पातियों में घोषित किया था, वह दिवस जब तूने समस्त सृजित वस्तुओं पर अपने नामों की प्रभा बिखराई है। उसे प्राप्त तेरा आशीष महान है जिसने स्वयं को तेरी ओर उन्मुख किया है और तेरा सान्निध्य प्राप्त किया है और तेरी वाणी की प्रखरता को ग्रहण किया है।
मैं तुझसे याचना करता हूँ, हे मेरे स्वामी, तेरे उस नाम से, जिसके चहुँओर नामों का साम्राज्य आराध्य भाव से परिक्रमा करता है, कि तू अपने उन प्रियजनों की सहायता कर जो तेरे सेवकों के मध्य तेरी वाणी की महिमा का बखान करते हैं और दूर-दूर तक तेरे प्राणियों के मध्य तेरा यशोगान करते हैं, जिससे तेरी धरा के निवासियों की आत्माएँ तेरे प्राकट्य के आह्लाद से भर उठीं हैं।
हे मेरे स्वामी! तूने अपने अनुग्रह की जीवंत जलधाराओं तक पहुँचने में उनका मार्गदर्शन किया है, उन्हें उदारता से यह वर दे कि वे तुझसे विमुख न हों। तूने उन्हें अपनी सिंहासन-स्थली तक बुलाया है, अपनी स्नेहयुक्त दयालुता के द्वारा तू उन्हें अपनी समीपता से दूर न कर। उनके पास वह भेज जो उन्हें तेरे अतिरिक्त अन्य सबसे पूरी तरह अनासक्त कर दे। तू अपनी समीपता के आकाश में उन्हें उड़ान भरने में इतना समर्थ बना कि न तो दमनकर्ता के तीव्र प्रहार और न ही तेरी परम पावनता और परम शक्तिमानता में अविश्वास करने वालों के भ्रामक परामर्श उन्हें तुझसे दूर कर सकें।

-Bahá'u'lláh
-----------------------

शिक्षण (#8684)

स्तुति हो तेरी, हे स्वामी, मेरे ईश्वर! मैं तुझसे याचना करता हूँ तेरे उस नाम से, जिसे किसी ने भी उचित रूप से नहीं पहचाना है और जिसके आशय की थाह कोई नहीं पा सकता है। मैं प्रार्थना करता हूँ तेरे उस नाम से, जो तेरे प्राकट्य का निर्झर-स्रोतऔर तेरे चिन्हों का अरुणोदय है कि मेरे हृदय को अपने स्मरण तथा अपने प्रेम का पात्र बना। तब उसे अपने विशाल महासागर में इस प्रकार निमग्न कर दे कि उससे तेरी प्रज्ञा, तेरी महिमा तथा तेरी स्तुति की जीवंत धारायें प्रवाहित हो उठें।
मेरी देह के अंग-प्रत्यंग तेरी एकता को प्रमाणित करते हैं और मेरे सिर के बाल तेरी प्रभुसत्ता तथा सामर्थ्‍य की घोषणा करते हैं। मैं, अंकिचन, अपने अस्तित्व को नकार कर तेरी महिमा के द्वार पर खड़ा हुआ हूँ और मैंने तेरे आंचल के छोर को दृढ़ता से थाम लिया है और तेरे उपहार के क्षितिज पर अपनी आँखें टिका ली हैं।
मेरे लिये, हे मेरे ईश्वर! वह नियत कर जो तेरी भव्यता की महानता के अनुरूप हो। अपनी शक्तिदायिनी अनुकम्पा द्वारा मेरी सहायता कर कि मैं तेरे धर्म का ऐसे संदेश दूँ कि जिससे मृतप्राय जन भी तत्क्षण उठ खड़े हों और तुझमें विश्वास प्रकट करके तेरे प्राकट्य के उदयस्थल तथा तेरे धर्म की ओर अपनी दृष्टि स्थिर कर, दौड़ पड़ें।
तू वस्तुतः सर्वशक्तिमान्, सर्वोच्च, सर्वज्ञाता तथा सर्वप्रज्ञ है।

-Bahá'u'lláh
-----------------------

शिक्षण (#14350)

ईश्वर, जो सभी अवतारों का प्रकटकर्ता है, सभी उद्गमों का मूल है, समस्त धर्मों का जनक है, समस्त प्रकाशपुंजों का स्रोत है, मैं साक्षी देता हूँ कि तेरे नाम से बोध का आकाश विभूषित हुआ है, वाणी का महासिंधु उमड़ा है और समस्त धर्मों के मानने वालों के मध्य तेरे मंगलविधान का शासन लागू हुआ है।
मैं याचना करता हूँ तुझसे कि मुझे इतना समृद्ध बना कि मैं तेरे सिवा अन्य सब कुछ से मुक्त हो जाऊँ और तेरे अतिरिक्त अन्य किसी पर आश्रित न रहूँ। तब मुझ पर अपनी कृपा के मेघों की वह बरखा बरसा जो तेरे लोकों के प्रत्येक लोक में लाभकारी हो। तब अपनी शक्तिदायिनी अनुकम्पा द्वारा मेरी सहायता कर कि मैं तेरे सेवकों के मध्य तेरे धर्म की सेवा कर सकूँ और कुछ ऐसा कर दिखाऊँ कि जब तक तेरा साम्राज्य और तेरी सम्प्रभुता है तब तक मैं याद किया जाऊँ।  
यह तेरा सेवक है, हे मेरे स्वामी ! जो तेरी कृपा के क्षितिज और तेरे उपहारों के आकाश की ओर पूर्ण समर्पण के साथ उन्मुख हुआ है।
तू सत्य ही, शक्ति और सम्पन्नता का स्वामी है। तू उन सबकी सुनता है जो तेरा गुणगान करते हैं। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, तू सर्वज्ञ सर्वप्रज्ञ है।

-Bahá'u'lláh
-----------------------

शिक्षण (#8685)

हे मेरे ईश्वर! तू देखता है मुझे दीनता में नत्, तेरे आदेशों के प्रति स्वयं को विनत होते हुए, तेरी सम्प्रभुता के प्रति समर्पित होते हुए, तेरे अधिराज्य की सामर्थ्‍य से प्रकम्पित होते हुए, तेरे कोप से बचते हुए, तेरी कृपा की याचना करते हुए, तेरी क्षमाशीलता पर भरोसा किये हुए, तेरे क्रोध के भय से कम्पायमान होते हुए; मैं धड़कते हृदय, अश्रुपूरित नेत्र और याचना भरी अंतश्चेतना से और सभी वस्तुओं से पूर्ण अनासक्ति के साथ तुझसे याचना करता हूँ कि तू अपने प्रेमियों को अपने साम्राज्य के आर-पार भेदती किरणों के समान बना और अपने सेवकों को अपने पावन शब्दों का गुणगान करने में सहायता दे ताकि उनके मुखड़े प्रकाश से प्रभासित और दीप्तिमान हो सकें, उनके हृदय रहस्यों से परिपूरित हो जायें और प्रत्येक आत्मा अपने पापों से मुक्त हो सके। निर्लज्ज बन गये लोगों और अधर्मियों तथा अन्याय करने वालों से उनकी रक्षा कर। सत्य ही, तेरे चाहने वाले प्यासे हैं। हे स्वामी! उन्हें अपनी दया और कृपा के निर्झर स्रोत तक ले चल। सत्य ही, वे भूखे हैं, उन तक अपना दिव्य भोज भेज। सत्य ही, वे वस्त्रविहीन हैं, उन्हें विद्वता और ज्ञान के परिधान से विभूषित कर। वे शूरवीर हैं, हे मेरे ईश्वर! उन्हें युद्ध क्षेत्र तक ले चल। वे मार्गदर्शक हैं, उन्हें तर्कों एवं प्रमाणों से युक्त बना। वे तेरे सक्रिय सेवक हैं उन्हें सेवा में दृढ़ता की मदिरा के प्याले को सबमें बांटने वाला बना। हे ईश्वर उन्हें ऐसे गायक बना जो सुदूर उपवनों में तेरा यशोगान करते हैं। उन्हें ऐसे सिंह बना, जो जंगलों में विचरण करते हैं, उन्हें ऐसे मत्स्य बना, जो अतल गहराइयों में गोते लगाते हों। सत्य ही, तू असीम अनुकम्पाओं से परिपूर्ण है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, सामर्थ्‍यवान, शक्तिसम्पन्न, दाता।

-`Abdu'l-Bahá
-----------------------

शिक्षण (#8686)

हे मेरे ईश्वर, तू अपने सेवकों को शब्द का प्रसार में, और जो व्यर्थ और मिथ्या है उसका खण्डन करने में, सत्य को स्थापित करने में, पवित्र छंदों को सर्वत्र प्रसार में, भव्याताओं को प्रकट करने में, और सदाचारियों के हृदयों में प्रभात के प्रकाश को अभिव्यक्त होने में सहायता दें। तू, सत्य ही, उदार, क्षमाशील है।

-`Abdu'l-Bahá
-----------------------

