प्रभात (#8348)

हे मेरे ईश्वर! मैं तेरी शरण में जाग उठा हूँ, और जो उस शरण की कामना करे उसके लिये यह उचित है कि वह तेरे संरक्षण के शरण-स्थल और तेरी सुरक्षा के दुर्ग में निवास करे। हे मेरे स्वामी! अपने प्रकटीकरण के उद्गमस्थल की भव्यताओं से मेरे अंर्तमन को प्रदीप्त कर दे वैसे ही, जैसे तूने मेरे बाह्य अस्तित्व को अपनी कृपा के प्रभात-प्रकाश द्वारा आलोकित किया है।

-Bahá'u'lláh
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प्रभात (#8349)

हे मेरे ईश्वर और मेरे स्वामी! मैं तेरा सेवक और तेरे सेवक का पुत्र हूँ। इस प्रभात बेला में मैं अपनी शय्या से जाग उठा हूँ, जब तेरी एकमेवता का दिवानक्षत्र, उसके अनुसार जो तेरे आदेश की पुस्तकों में विहित किया गया है तेरी इच्छा के उद्गमस्थल से चमक उठा है और समस्त जगत पर अपनी प्रभा बिखेरी है।
स्तुति हो तेरी, हे मेरे ईश्वर, कि हम तेरे ज्ञान के आलोकपुंज के प्रति जाग उठे हैं। हमारे लिये वह भेज, हे मेरे स्वामी! जो हमें इस योग्य बना दे कि हम तेरे सिवा अन्य सभी से अनासक्त हो सकें, जो हमें तेरे सिवा सभी आसक्तियों से मुक्त होने में समर्थ बनाये। मेरे लिये और जो मेरे प्रियजनों के लिए, स्त्री-पुरुष सभी के लिये समान रूप से, इहलोक और परलोक के शुभ और कल्याण का विधान कर। अपने अचूक संरक्षण के द्वारा हमें उन सबसे सुरक्षित रख जिन्हें तूने आसुरी प्रवृत्तियों का मूर्तरूप बनाया है, हे तू सम्पूर्ण सृष्टि के परमप्रिय और सम्पूर्ण विश्व की कामना! तू जो चाहे करने में समर्थ है। तू सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, संकटमोचन स्वयमाधार है।
हे स्वामी, मेरे ईश्वर! उसे आशीष दे, जिसे तूने अपनी परम श्रेष्ठ उपाधियों के साथ भेजा है और जिसके द्वारा तूने सदाचारियों और दुष्टों को विभक्त किया है, और मुझे अनुग्रहपूर्वक वह करने में सहायता दे जिसे तू प्रेम करता है और जिसकी तू इच्छा करता है। इसके अतिरिक्त हे मेरे ईश्वर उनको आशीष दे जो तेरे शब्द और तेरे अक्षर है और वे जो तेरी ओर उन्मुख हुए हैं, और जो तेरी मुखमण्डल की ओर प्रवृत्त हो गये हैं, और तेरे आह्वान को सुना है। 
तू सत्य ही, समस्त जनों का स्वामी और सम्राट है, और समस्त वस्तुओं पर सामर्थ्‍यवान है।

-Bahá'u'lláh
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