दृढ़ता (#8310)

महिमावंत हो तेरा नाम, हे स्वामी, मेरे ईश्वर! तेरी शक्ति के द्वारा, जिसने समस्त सृष्टि को आवृत्त किया है और तेरी उस स्वामित्व के नाम से, जो सम्पूर्ण सृष्टि से परे है और तेरे विवेक में लुप्त उस शब्द के नाम से, जिसके द्वारा तूने आकाश और धरती की सृष्टि की है, मैं याचना करता हूँ, ऐसा वर दे कि तेरे लिये अपने प्रेम में हम दृढ़ रह सकें, तेरी प्रसन्नता के अनुकूल आज्ञा पालन में अडिग बनें, तेरे मुखड़े को निरंतर नेत्रों से निहार सकें और तेरी महिमा की स्तुति कर सकें। हे मेरे ईश्वर ! चहुँओर तेरे प्राणियों के मध्य तेरे नाम के प्रकाश फैलाने और तेरे साम्राज्य में तेरे धर्म की रक्षा करने की हमें शक्ति दे। सदा रहा है तेरा स्वतंत्र अस्तित्व सदा रहा है और तू सदासर्वदा ऐसा ही रहेगा, तेरे प्राणी तेरा स्मरण करें, न करें! तुझको ही मैने अपनी पूरी आस्था समर्पित की है, तेरी ओर ही मैं उन्मुख हुआ हूँ, तेरे प्रेममय विधान की डोर को मैंने दृढ़ता से थाम रखा है और तेरी कृपा की छत्रछाया की ओर मैंने अपने पाँव बढ़ाये हैं। मुझे अपने द्वार के बाहर रख कर निराश मत कर, हे मेरे ईश्वर! अपनी दया मुझसे दूर मत रख, क्योंकि मैं केवल तेरी ही कामना करता हूँ। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, सदा क्षमाशील, सर्वकृपालु। स्तुति हो तेरी हे तू, जो उनका प्रियतम है, जिन्होंने तुझे जाना है।

-Bahá'u'lláh
-----------------------

दृढ़ता (#8311)

हे तू, जिसकी निकटता मेरी कामना है, जिसका सान्निध्य मेरी आशा है, जिसका स्मरण मेरी आकांक्षा है, जिसकी महिमा का प्रांगण मेरी मंजिल है, जिसका निवास ही मेरा लक्ष्य है, जिसका नाम  मेरा रोग-निवारक है, जिसका प्रेम मेरे हृदय की शक्ति है, जिसकी सेवा मेरी सर्वोच्च अभिलाषा है; मैं तेरे नाम के द्वारा जिसके द्वारा तूने, तुझे पहचानने वालों को अपने ज्ञान की परम उदात्त ऊँचाइयों तक उड़ने में समर्थ बनाया है, और भक्तिपूर्वक तेरी आराधना करने वालों को अपने अनुग्रह की परिधि में पहुँचने की शक्ति दी है, तुझसे याचना करता हूँ कि मुझे तेरे मुखारविंद की ओर उन्मुख होने में, तुझ पर अपनी दृष्टि स्थिर रखने में, और तेरी महिमा की चर्चा करने में सहायता दे।
मैं वह हूँ, हे मेरे नाथ! जिसने तेरे अतिरिक्त सब कुछ भुला दिया है और जो तेरी कृपा के दिवास्रोत की ओर उन्मुख हो गया है, जिसने तेरे प्रांगण की निकटता पाने की आशा में, तेरे अतिरिक्त अन्य सब का परित्याग कर दिया है। देख मुझे उस आसन की ओर निहारते हुए जो तेरे मुखारबिंद के प्रकाश की भव्यता से प्रकाशमान है। इसलिये, हमारे प्रियतम, मुझ तक वह भेज जो मुझे तेरे धर्म में दृढ़ रहने के योग्य बनाये, जिससे नास्तिकों के संदेह, मुझे तेरी ओर उन्मुख होने में बाधक न बन सकें। 
वस्तुतः, तू ही शक्ति का ईश्वर, संकट में सहायक, सर्वप्रतापशाली, सामर्थ्‍यशाली है!

-Bahá'u'lláh
-----------------------

दृढ़ता (#8312)

हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! मैं पश्चाताप में तेरी ओर मुड़ा हूँ। वस्तुतः तू ही क्षमादाता, करुणामय है। हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! मैं तेरे पास लौट आया हूँ और सत्य ही, तू ही सदा क्षमाशील, कृपालु है। 
हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! मैं तेरी कृपा की डोर से बंध गया हूँ। तेरे ही पास आकाश और धरती की सभी सम्पदाओं का अक्षय भण्डार है। 
हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! मैंने तेरी ओर आने की शीघ्रता की है और सत्य ही, तू ही क्षमा करने वाला और कृपा का स्वामी है। 
हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! मैं तेरी कृपा की दिव्य मदिरा का प्यासा हूँ। और सत्य ही तू दाता, कृपालु, सर्वसामर्थ्‍यवान, सर्वशक्तिशाली है। 
हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! मैं साक्षी देता हूँ कि तूने अपना धर्म प्रकट किया है, अपना वचन पूरा किया है और अपनी कृपा के आकाश से उसे अवतरित किया है, जिसने तेरे कृपापात्रों के हृदय तेरी ओर खींच लिये हैं। सौभाग्य होगा उसका जिसने तेरी मजबूत डोर को दृढ़ता से थाम लिया है और तेरे देदीप्यमान परिधान की छोर से जो दृढ़ता से बंधा है। 
हे समस्त अस्तित्व के स्वामी, गोचर और अगोचर के सम्राट ! मैं तेरी शक्ति, तेरी भव्यता और तेरी सम्प्रभुता के नाम पर याचना करता हूँ कि अपनी महिमा की लेखनी द्वारा मेरा नाम अपने उन श्रद्धालु भक्तों की श्रेणी में अंकित कर दे, जिन्हें पापियों के लम्बे लेख तेरे मुखारबिंद के प्रकाश की ओर उन्मुख होने से रोक नहीं पाये हैं। हे प्रार्थना सुनने वाले और उसका प्रत्‍युत्‍तर देने वाले ईश्वर !

-Bahá'u'lláh
-----------------------

दृढ़ता (#8313)

स्तुति हो तेरी, हे मेरे ईश्वर। मेरे परम् प्रियतम! अपने धर्म में मुझे दृढ़ बना और वर दे कि मैं उनमें गिना जाऊँ जिन्होंने तेरी संविदा का उल्लंघन नहीं किया है और न ही अपनी व्यर्थ कल्पना के देवों का अनुसरण किया है। मुझे समर्थ बना कि तेरे सान्निध्य में मैं सत्यतः का दामन थाम सकूँ, अपनी दया का दान दे और मुझे अपने उन सेवकों में शामिल होने दे जो भय नहीं करते, न ही चिन्तातुर होते हैं। मुझे मेरे हाल पर न छोड़, हे ईश्वर, न ही मुझे उसे पहचानने से वंचित कर जो तेरा ही प्रतिरूप है और न ही मुझे उनमें गिन जो तुझसे विमुख हो चुके हैं। हे मेरे ईश्वर! मुझे उनमें गिन जिन्होंने तेरे सौन्दर्य को पहचाना है, जिन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर करने का सौभाग्य प्राप्त किया है और जो अपने समर्पण का एक पल भी सम्पूर्ण सृष्टि के साम्राज्य के बदले देना पसंद नहीं करेंगे। हे ईश्वर, दया कर, विशेषरूप से तब जब तेरी धरती के अधिकांश लोग राह भटक गये हैं, घातक दोषों से भर गये हैं। हे मेरे ईश्वर, मुझे वह दे जो तेरी दृष्टि में शोभनीय है। तू, सत्य ही, सर्वशक्तिशाली, उदार, करुणामय और सदा क्षमाशील है।
वर दे, हे मेरे ईश्वर! कि मैं उनमें न गिना जाऊँ जो कान रहते सुन नहीं पाते, आँख रहते देख नहीं पाते, जिह्वा होते हुए भी मूक बने बैठे हैं और जिनके हृदय कुछ भी समझने में विफल हो गये हैं। हे ईश्वर, मुझे अज्ञानता की अग्नि और स्वार्थी इच्छाओं से मुक्त कर, अपनी सर्वोच्च दया की परिधि में रहने दे और मुझे वह दे जो तूने चुने हुये जनों के लिये निर्धारित किया है। तू जैसा चाहे करने में समर्थ है। सत्य ही तू, संकट में सहायक, स्वयंजीवी है।

-The Báb
-----------------------

दृढ़ता (#8314)

तू स्तुत्य और महिमावंत है, हे ईश्वर! तेरी निकटता प्राप्त करने का दिवस शीघ्र आये, ऐसा कर दे। अपने प्रेम और प्रसन्नता की शक्ति से हमारे हृदय उल्लसित कर दे जिससे हम स्वेच्छा से तेरी इच्छा और आदेश के प्रति समर्पित हो सकें, ऐसी दृढ़ता प्रदान कर। वस्तुतः तेरे ज्ञान की परिधि में वह सब हैं, जिनका सृजन तूने किया है और जिनका सृजन तू करेगा। तेरी शक्ति उन सबकी समझ से परे है, जिनको तूने अस्तित्व दिया है और जिन्हें तू अस्तित्व देगा। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, जिसकी आराधना मेरी कामना है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, जो स्तुत्य है। तेरी सुप्रसन्नता के अतिरिक्त मुझे कोई भी प्रिय नहीं है। 
वस्तुतः; तू ही सर्वोपरि शासक, परम् सत्य, संकट में सहायक, स्वःनिर्भर है।

-The Báb
-----------------------

दृढ़ता (#8315)

हे स्वामी, मेरे ईश्वर्! अपने प्रियजनों को अपने धर्म में अडिग रहने, अपने पथ पर चलने, ईश्वर के धर्म में दृढ़ रहने में सहायता दे। उन्हें अपनी कृपा प्रदान कर कि वे अहंकार और वासना के आघातों को सह सकें और तेरे दिव्य मार्गदर्शन का अनुसरण कर सकें। तू शक्तिशाली, कृपालु, स्वनिर्भर, उदात्त, करुणामय, सर्वसमर्थ, सर्वदयालु है।

-`Abdu'l-Bahá
-----------------------

