एकता (#14337)

हे मेरे ईश्वर! हे मेरे ईश्वर! अपने सेवकों के हृदयों को एक कर दे और उन पर अपना महान उद्देश्य प्रकट कर। जिससे वे तेरे आदेशों का अनुपालन करें और तेरे नियमों पर अटल रहें। हे ईश्वर! तू उनके प्रयासों में उनकी सहायता कर और उन्हें अपनी सेवा करने की शक्ति प्रदान कर। हे ईश्वर! उन्हें उनके ऊपर न छोड़; उनके पगों का, अपने ज्ञान के प्रकाश द्वारा मार्गदर्शन कर और उनके हृदयों को अपने प्रेम से आनंदित कर दे। सत्य ही, तू उनका सहायक और उनका स्वामी है।

-Bahá'u'lláh
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एकता (#14338)

ईश्वर करे, कि एकता की ज्योति सारी पृथ्वी पर छा जाये और ”साम्राज्य ईश्वर का है“ यह मुहर इसके समस्त जनों के ललाट पर अंकित हो जाये।

-Bahá'u'lláh
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एकता (#14339)

स्तुति हो तेरी, हे ईश्वर कि तूने मानवजाति के प्रति अपने प्रेम को प्रकट रूप दिया है। हे तू जो हमारा जीवन और हमारी ज्योति है, अपने पथ में अपने सेवकों का मार्गदर्शन कर और हमें तुझमें समृद्ध बना और तेरे अतिरिक्त अन्य सभी से हमें मुक्त रख। 
हे ईश्वर! हमें अपनी एकता की शिक्षा दे और अपनी एकता की हमसे अनुभूति करा जिससे कि हम तेरे अतिरिक्त अन्य कुछ न देखें, तू दयालु और उदारता का स्वामी है।
हे ईश्वर! अपने प्रियजनों के हृदयों में अपने प्रेम की ज्वाला प्रज्ज्वलित कर, जिससे कि वे तेरे अतिरिक्त, अन्य सभी विचारों को भस्मसात कर दें।
हे ईश्वर! हमारे सम्मुख अपनी परमोच्च अनन्तता को प्रकट कर, कि तू सदैव रहा है और सदा रहेगा और तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है। सत्य ही तुझ में हम विश्रांति और शक्ति पायेंगे।

-Bahá'u'lláh
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एकता (#14340)

हे तू, जो सम्राटों का सम्राट है! मैं साक्षी देता हूँ कि तू ही समस्त सृष्टि का स्वामी है और समस्त दृश्य-अदृश्य प्राणियों का शिक्षक है। मैं साक्षी देता हूँ कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड तेरी शक्ति के अधीन है और पृथ्वी की समस्त शक्तियाँ भी तुझे प्रकंपित नहीं कर सकतीं और न ही तेरे उद्देश्य को पूरा करने में सम्राटों और राष्ट्रों की शक्ति तुझे रोक सकती है। मैं स्वीकार करता हूँ कि सम्पूर्ण विश्व को नवजीवन देने और लोगों के बीच एकता की स्थापना करने तथा उनकी मुक्ति के अतिरिक्त तेरी कोई और इच्छा नहीं है।

-Bahá'u'lláh
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एकता (#14341)

हे दयालु ईश्वर! तूने समस्त मानवजाति को एक ही मूल कुटुम्ब से उत्पन्न किया है। तूने ऐसा निश्चित किया है कि सभी मनुष्य एक ही कुटुम्बी हैं। तेरे पवित्र सान्निध्य में सब तेरे ही सेवक हैं और समस्त मानवजाति तेरी ही छत्रछाया में आश्रित है। सब तेरी उदारताओं के सहभोज में एकत्रित हैं। सब तेरे मंगल विधान की ज्योति से प्रकाशित हैं।
हे ईश्वर ! तू सब पर कृपालु है, तूने सबको आजीविका दी है, सबको आश्रय दिया है, सबको जीवन प्रदान किया है; तूने सबको प्रतिभा और गुणों से सम्पन्न किया है; सब तेरी कृपा के महासागर में निमग्न हैं। हे तू दयालु स्वामी ! सबको एक कर दे। धर्मों को सहमत होने दे, राष्ट्रों को एक राष्ट्र बना दे, ताकि वे सब परस्पर एक-दूसरे को, एक ही परिवार के सदस्यों की भाँति देखें और सम्पूर्ण वसुधा को एक ही कुटुम्ब मानें। वे सब मिलकर सद्भाव के वातावरण में रहें। हे ईश्वर! मानवजाति की एकता का ध्वजा उन्नत कर दे। हे ईश्वर! परम् महान शांति स्थापित कर। सबके हृदयों को मिलाकर एक कर दे। हे तू दयालु पिता, हे ईश्वर, अपनी स्नेह-सुरभि से हमारे हृदयों को उल्लास से भर दे। अपने मार्गदर्शन के प्रकाश द्वारा हमारे नेत्रों को प्रदीप्त कर। अपने शब्दों के स्वरमाधुर्य से हमारे कानों को झंकृत कर दे और अपने मंगल विधान के संरक्षण के दुर्ग में आश्रय प्रदान कर। तू सर्वसमर्थ, सर्वशक्तिमान्, क्षमावंत, मानवजाति की दोषों को अनदेखा करने वाला है।

-`Abdu'l-Bahá
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