अनासक्ति (#14314)

तू महिमावंत है, हे मेरे ईश्वर! मैं धन्यवाद देता हूँ तुझे कि तूने मुझे उसका ज्ञान कराया, जो तेरी दया का उद्गमस्थल है, जो तेरी अनुकम्पा का उदयस्थल है और जो तेरे धर्म का कोषागार है। जिस नाम के स्मरण मात्र से उनके चेहरे दीप्तिमान हो उठते हैं, जो तेरे समीप हैं और उनके हृदय-पखेरू तुझ तक पहुँचने के लिये तड़प उठते हैं, जो तेरे भक्त हैं। मैं तेरे उस नाम के सहारे याचना करता हूँ कि यह वर दे कि प्रतिपल, प्रत्येक परिस्थिति में तेरी डोर को थामे रहूँ और तुझे छोड़कर अन्य सबकी आसक्ति से मुक्त हो जाऊँ और तेरे प्रकटीकरण की ओर एकटक देखता रहूँ और तूने जो अपनी पातियों में विहित किया है उसका अनुपालन कर सकूँ। हे मेरे ईश्वर! मेरे बाह्य और अन्तर्मन को अपनी अनुकम्पा और प्रेममय दया के परिधान से सुसज्जित कर। मुझे सुरक्षित रख और तुझे जो कुछ भी अप्रिय है उससे दूर रख और अपनी आज्ञाओं के अनुपालन में कृपापूर्ण मेरी और मेरे प्रियजनों की सहायता कर और मेरे अंदर जो भी विषय-प्रवृत्ति और दुष्काम भाव हैं उन पर विजय पाने में मेरी सहायता कर।
तू सत्य ही, समस्त मानवजाति का ईश्वर है, और इहलोक और परलोक का स्वामी है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, सर्वज्ञ,

-Bahá'u'lláh
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अनासक्ति (#14315)

हे मेरे ईश्वर ! मुझे अपने निकट आने की और अपने प्रांगण की पावन परिधि में रहने की अनुमति दे। तुझसे दूर रहकर मैं निष्प्राण हो गया हूँ; अपने अनुग्रह के पंखों की छाया तले विश्राम करने दे, तुझसे वियोग की ज्वाला ने मेरे हृदय को द्रवित कर दिया है। मुझे, उस सरिता के निकट ला जो सत्य ही जीवन है। तेरी खोज में मेरी आत्मा निरंतर प्यास से दग्ध हो गई है। हे मेरे ईश्वर ! मेरी आहें, मेरी वेदना की तीक्ष्णता और मेरे आँसू तेरे प्रति मेरे प्रेम के प्रतीक हैं। उस गुणगान के माध्यम से जिसका बखान तू ने किया, मैं याचना करता हूँ, ऐसी अनुकम्पा कर कि मैं उन लोगों में गिना जाऊँ जिन्होंने तेरे दिवस में तुझे पहचाना है और तेरी प्रभुसत्ता स्वीकार की है। हे मेरे ईश्वर! अपनी प्रेममयी दयालुता के जीवंत जल का अपनी दया के करों से पान करने में सहायता कर, ताकि मैं तुझे छोड़, सब कुछ को पूरी तरह भूला दूँ और पूरी तरह तुझमें ही रम जाऊँ। तू जो चाहे करने में समर्थ है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, संकट में सहायक, स्वनिर्भर। तू सर्वशक्तिमान है; हे तू, जो सभी सम्राटों का सम्राट है, तेरी ही महिमा का गुणगान हो।

-Bahá'u'lláh
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अनासक्ति (#14316)

तेरे ही नाम की स्तुति हो,, हे मेरे ईश्वर! तेरी आज्ञा से और तेरी इच्छा के अनुकूल सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त, तेरी अनुकम्पा के परिधान की सुरभि के सहारे और तेरे दिव्य इच्छा के सूर्य के सहारे, जो तेरे दया के क्षितिज पर तेरी शक्ति और प्रभुसत्ता के साथ प्रकाशमान हुआ है, मैं याचना करता हूँ कि मेरे हृदय से व्यर्थ-कल्पनाओं और निरर्थक धारणाओं को धो डाल, ताकि तन-मन से मैं तेरी ओर उन्मुख हो सकूँ। हे तू, जो सम्पूर्ण मानवजाति का स्वामी है! मैं तेरा सेवक और तेरे सेवक का पुत्र हूँ ! हे मेरे ईश्वर ! मैंने तेरी अनुकम्पा की बांह पकड़ ली है और तेरी स्नेहिल कृपा की डोर को दृढ़ता से थाम लिया है। मेरे लिये शुभ पदार्थों का विधान कर जो तेरी हैं और अपने आशीष के आकाश से, अपने अनुग्रह के आकाश से भेजे गये सहभोज में सम्मिलित होने दे। तू सत्य ही, सभी लोकों का स्वामी है और उन सबका ईश्वर है, जो धरती और आकाश पर हैं।

-Bahá'u'lláh
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अनासक्ति (#14317)

हे ईश्वर! तेरे धर्म की ऊष्मा ने अनेक अचेत हृदयों को प्रदीप्त किया है और तेरी वाणी के माधुर्य ने अनेक सोये हुए लोगों को जगाया है। न जाने कितने ऐसे अनजाने लोग हैं, जिन्होंने तेरी एकता के तरुवर की छाया में आश्रय चाहा है और न जाने कितने ऐसे प्यासे लोग हैं जो तेरे इस दिवस में तेरी जीवंत जलधारा की ओर आकुल हो दौड़ पड़े हैं। 
वह धन्य है जो तेरी ओर उन्मुख हुआ है और जिसने तेरी मुख-ज्योति के उद्गमस्थल की उपस्थिति पाने की शीघ्रता की है। धन्य है वह जो पूर्ण स्नेह से तेरे प्राकट्य के उदयस्थल की ओर, तेरी प्रेरणा के निर्झरस्रोत की ओर उन्मुख हुआ है। धन्य है वह जिसने तेरे पथ में तेरी उदारता और कृपा से प्राप्त अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया है। धन्य है वह जिसने तुझे पाने की उत्कट चाह में तेरे सिवा अपना सर्वस्व त्याग दिया है। धन्य है वह जिसने तेरी अंतरंग घनिष्ठता का सुख पाया है और जो सिवाय तेरे सब कुछ से विरक्त हो गया है।
मैं याचना करता हूँ, हे मेरे नाथ ! उसके माध्यम से जो तेरा ’नाम‘ है, तेरी ही सत्ता से जो उसके कारागार के क्षितिज पर उदित हुई है, कि तू सबको वह प्रदान कर जो तू उचित समझता है और जो तेरे परम पद के अनुरूप है। वस्तुतः, तेरी शक्ति  सर्वोपरि है।

-Bahá'u'lláh
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अनासक्ति (#14318)

हे मेरे ईश्वर, मैं नहीं जानता, कि वह कौन सी अग्नि है जो तूने अपनी धरा पर प्रज्वलित की है। धरती कभी भी इसके तेज को आच्छादित नहीं कर सकती और न जल इसकी अग्नि को बुझा सकता है। संसार के समस्त निवासी भी इसके वेग को बाधित करने में असमर्थ हैं। वह जो इसके निकट खिंच आया है और इसकी गर्जना को जिसने सुना है उसे प्राप्त आशीर्वाद महान हैं।
हे मेरे ईश्वर, कुछ को, तूने अपनी शक्तिदायिनी कृपा के द्वारा इसकी ओर आने के योग्य बनाया है, जबकि दूसरों को इस कारण जो तेरे दिवस में उनके हाथों ने किया है, पीछे रखा है। जिसने भी शीघ्रता से इसकी ओर पग बढ़ाये हैं और तेरे सौन्दर्य को निहारने की उत्कंठा में जो भी तुझ तक पहुँचा है, उसने तेरे पथ में अपना जीवन न्योछावर कर दिया है और तेरे अतिरिक्त अन्य सब कुछ से पूर्णतया अनासक्त होकर तुझ तक पहुँच गया है।
मैं याचना करता हूँ कि उस ज्वाला से जो तेरी सृष्टि में प्रज्ज्वलित हुई है, उन पर्दों को विदीर्ण कर दे, जिन्होंने मुझे तेरी भव्यता के सिंहासन के सम्मुख उपस्थित होने और तेरे प्रवेश-द्वार पर खड़ा होने से रोक रखा है। हे मेरे ईश्वर! मेरे लिये अपने ग्रंथ में विहित प्रत्येक उत्तम वस्तु का विधान कर और मुझे अपनी दया की शरण से दूर हटाये जाने का दुःख न दे। तू जैसा चाहे वैसा करने में सक्षम है; तू निश्चय ही, सर्वशक्तिशाली, परम उदार है।

-Bahá'u'lláh
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अनासक्ति (#14319)

स्तुति हो तेरी हे मेरे ईश्वर! मैं तेरे उन सेवकों में से एक हूँ जिन्होंने तुझ पर और तेरे चिन्हों पर विश्वास किया है। तू देखता है कि कैसे तेरी दया के द्वार की ओर मैं अपना ध्यान लगाये हुए हूँ और तेरी स्नेहमयी कृपा की ओर उन्मुख हो गया हूँ। मैं तुझसे याचना करता हूँ, तेरी परम श्रेष्ठ उपाधियों और परम उदात्त गुणों के नाम से, कि मेरे सम्मुख अपने वरदानों के द्वार खोल दे और तब जो शुभ हो वह करने में मेरी सहायता कर। हे तू, जो सभी नामों और गुणों का स्वामी है!
हे मेरे ईश्वर! मैं दरिद्र हूँ, तू सर्वसम्पन्न है! मैं तेरी ओर उन्मुख हूँ और स्वयं को तेरे अतिरिक्त अन्य सभी से मुक्त कर लिया है। मैं विनती करता हूँ तुझसे कि मुझे अपनी मृदुल दया के पवन झकोरों से वंचित मत कर और जो कुछ तूने अपने चुने हुए  सेवकों के लिये निश्चित किया है, उसे मुझ तक आने से न रोक।
हे मेरे ईश्वर, मेरे नेत्रों से पर्दा हटा दे, जिससे जो भी तूने अपने प्राणियों के लिये चाहा है, मैं उसे पहचान पाऊँ और तेरे सृजन के सभी मूर्त रूपों में तेरी सर्वसामर्थ्‍यमय शक्ति के प्रकटीकरणों को खोज पाऊँ। हे मेरे प्रभु, मेरी आत्मा को अपने परम सामर्थ्‍यमय चिन्हों से उल्लसित कर दे और मुझे मेरी भ्रष्ट और अधम इच्छाओं की गर्त से बाहर निकाल। तब मेरे लिये इहलोक और परलोक के समस्त शुभ मंगल का विधान कर। तुझमें जो चाहे वह करने की सामर्थ्‍य है। तुझ सर्वमहिमावान के अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, जिसकी सहायता की कामना सभी मानव करते हैं।
हे मेरे ईश्वर, मैं धन्यवाद देता हूँ तुझे, कि तूने मुझे मेरी निद्रा से जगाया और मुझे गतिमान कर दिया है और मेरे अंदर वह देख पाने की लालसा जगाई है जिसे समझने में तेरे अधिकांश सेवक विफल रहे हैं। इसलिये, हे मेरे ईश्वर, अपने प्रेम और प्रसन्नता के लिये तेरी जो भी कामना है, वह देखने योग्य मुझे बना। तू वह है जिसकी सामर्थ्‍य और सत्ता की शक्ति की समस्त वस्तुएँ साक्षी हैं।
तू सर्वशक्तिमान, कल्याणकारी है; तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है !

-Bahá'u'lláh
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अनासक्ति (#14320)

तेरे स्वामी, सृष्टिकर्ता, सर्वपरिपूरक, परम उदात्त के नाम से जिसकी याचना सभी मनुष्य करते हैं, कहोः ”हे मेरे ईश्वर! तू, जो समस्त धरती और आकाशों का रचयिता है, हे दिव्य लोक के स्वामी! तू भलीभाँति मेरे  हृदय के रहस्यों को जानता है, जबकि तेरा अस्तित्व तेरे अतिरिक्त अन्य सभी के ज्ञान से परे है। मेरा जो भी है, वह सब तू देखता है, जबकि तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ऐसा नहीं कर सकता है। अपने अनुग्रह से मेरे लिये वह प्रदान कर जो मुझे तेरे सिवा अन्य सबसे स्वतंत्र कर दे। ऐसा कर कि मैं इहलोक और परलोक में अपने जीवन के सुफल प्राप्त करूँ। मेरे सम्मुख अपने अनुग्रह के द्वार खोल दे और कृपापूर्वक मुझे अपनी स्नेहिल दया और वरदानों से विभूषित कर। 
हे तू, जो असीम अनुकम्पाओं का स्वामी है। जो तुझसे प्रेम करते हैं, उन्हें अपनी दिव्य सहायता से आवृत कर और हमें अपने उपहारों और उदारताओं का दान दे। तू हमारे लिये पर्याप्त बन। हमारे पापों को क्षमा कर दे और हम पर दया कर। तू ही हमारा स्वामी और सभी सृजित वस्तुओं का स्वामी है। तेरे अतिरिक्त हम अन्य किसी का आह्वान नहीं करते और तेरे अतिरिक्त अन्य किसी के अनुग्रहों की याचना नहीं करते। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, सर्वसम्पन्न, सर्वोच्च!
हे मेरे स्वामी, अपने दिव्य संदेशवाहकों पर, उन पावन और सदाचारी जनों पर अपने आशीष प्रदान कर। सत्य ही तू, अद्वितीय, सर्ववशकारी ईश्वर है।

-The Báb
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अनासक्ति (#14321)

हे स्वामी! मैं तेरी शरण में आना चाहता हूँ, और तेरे समस्त चिन्हों की ओर मैं अपना हृदय लगाये हुए हूँ।
हे स्वामी! चाहे यात्रा में हूँ या घर में, और अपने व्यवसाय अथवा अपने कार्य में; मैं अपनी सम्पूर्ण आस्था तुझमें ही रखता हूँ। 
तब मुझे अपनी पर्याप्त सहायता प्रदान कर जो मुझे समस्त वस्तुओं से स्वतंत्र कर दे, हे तू जो अपनी दया में सर्वोत्तम है!
हे स्वामी! मुझे मेरा अंश प्रदान कर, जैसा तू चाहता है और जो भी तूने मेरे लिए नियत किया है उसमें मुझे संतुष्ट कर दे। आदेश देने का सम्पूर्ण अधिकार तेरा ही है।

-The Báb
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अनासक्ति (#14322)

हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! मेरे पात्र को समस्त वस्तुओं से अनासक्ति से भर दे, और अपनी भव्यता और दानशीलता के कारण प्रेम की मदिरा से मुझे उल्लसित कर दे, मुझे वासनाओं और कामनाओं के आघातों से मुक्त कर, मेरे इस निम्नतम के बांधनों को तोड़ डाल, परम आनन्द के साथ मुझे अपने अलौकिक लोक में ले चल और अपनी सेविकाओं के बीच मुझे अपनी पावनता की सांसों के द्वारा नवस्फूर्ति दे।
अपने आशीषों के प्रकाश से मेरे मुखड़े को दीप्तिमान कर, अपनी सर्वसमर्थ शक्ति के दर्शन से मेरे नेत्रों को नवज्योति प्रदान कर और अपने उस ज्ञान के द्वारा, जो सर्वसम्पूर्ण है, मुझे आह्लादित कर दे। हे तू, जो इहलोक और परलोक के साम्राज्य का राजाधिराज है! हे तू सत्ता और शक्ति के स्वामी! मेरी आत्मा को नवस्फूर्ति प्रदान करने वाले महान आनन्द के समाचारों से मुझे आनन्दविभोर कर दे, ताकि मैं तेरे प्रतीकों और तेरी शिक्षाओं का प्रसार दूर-दूर तक कर सकूँ, तेरे विधानों का पालन कर सकूँ और तेरी वचनों को यशस्वी बना सकूँ। तू निश्चय ही, शक्तिशाली, सर्वप्रदाता, सुयोग्य, सर्वशक्तिमान है।

-`Abdu'l-Bahá
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अनासक्ति (#14323)

हे ईश्वर! मेरे ईश्वर! तू मेरी आशा और मेरा प्रियतम, मेरा सर्वोच्च लक्ष्य और कामना है ! अत्यन्त विनीत भाव से और सम्पूर्ण समर्पण के साथ मैं तूझसे याचना करता हूँ, मुझे अपनी धरती पर अपने प्रेम की एक मीनार बना, अपने प्राणियों के मध्य अपने ज्ञान का दीप बना और अपने साम्राज्य में अपनी दिव्य कृपा की ध्वजा बनने दे। 
मुझे अपने ऐसे सेवकों में गिन जिन्होंने स्वयं को तेरे अतिरिक्त अन्य सबसे अनासक्त कर लिया है, स्वयं को इस संसार की क्षणभंगुर वस्तुओं से पवित्र कर लिया है और अपने आपको निरर्थक, कपोल कल्पनाओं की दुहाई देने वालों के इशारों से मुक्त कर लिया है। 
अपने लोक की चेतना की सम्पुष्टि के द्वारा मेरे हृदय को आनन्दविभोर कर दे और अपनी सर्वशक्तिमय महिमा के साम्राज्य से मुझ पर निरन्तर बरसने वाली दिव्य सहायता के समूहों के दर्शन से मेरे नेत्रों को दीप्तिमान कर दे। 
तू सत्य ही, सर्वसामर्थ्‍यशाली, सर्वमहिमामय, सर्वशक्तिमंत है।

-`Abdu'l-Bahá
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