अधिदिवस (#14354)

*(अधिदिवस उपवास, चार दिन (पाँच दिन अधि वर्ष में) बहाई वर्ष के अंतिम माह ’उच्चता‘  के पहले आते हैं  (26 फरवरी से 1 मार्च़) बहाउल्लाह ने  ’किताब-ए-अक़दस’ में आदेशित किया। इन दिनों को  ’अय्याम-ए-हा’ के दिवस के रूप में सम्मिलित किया ये दिवस आध्यात्मिक रूप से उपवास की तैयारी को समर्पित होते हैं,। परोपकार, अतिथि-सत्कार, दान और उपहार देने के दिवस हैं।)
 
मेरे ईश्वर, मेरी अग्नि और मेरे प्रकाश! वे दिन जिन्हें तूने ”अय्याम-ए-हा“ (हा के दिवस, या  अधिदिवस) अपने ग्रंथ में कहा है, प्रारम्भ हो गये हैं। हे तू, जो नामों का सम्राट है, और उपवास जिसे तेरी परमोच्च तूलिका ने उन सभी के लिए के लिये आदेशित किया है जो तेरी सृष्टि के साम्राज्य में निवास करते है, निकट आ रहे हैं। इन दिनों के नाम से और उन सबके नाम से जो इस दौरान तेरे आदेशों की बागडोर को दृढ़ता से थामे हुए हैं और जो तेरी शिक्षाओं से अभिभूत हैं, मैं तुझसे विनती करता हूँ, हे मेरे स्वामी, कि प्रत्येक आत्मा के लिये अपने प्रांगण में एक स्थान नियत कर और तेरे मुखारबिंद की ज्योति की भव्यता के प्रकटीकरण में प्रत्येक को एक आसन दे।
हे स्वामी ! तूने अपनी परम पावन पुस्तक में जो कुछ भी निर्दिष्ट किया है उससे कोई भी भ्रष्ट प्रवृत्ति उन्हें विमुख नहीं कर पाई है। ये तेरे धर्म के सम्मुख नत हुए हैं और तेरी परम पावन पुस्तक का इन्होंने ऐसे दृढ़ संकल्प से स्वागत किया है जो संकल्प स्वयं तुझसे जनित है। तूने उनके लिये जो भी आदेश दिया है उसका इन्‍होंने पालन किया है और जो कुछ तेरे द्वारा भेजा गया है उसके अनुसरण का चयन किया है।
तू देखता है, हे मेरे स्वामी, उन्होंने कैसे तेरे द्वारा तेरी पावन पुस्तक में प्रकटित सब कुछ को पहचाना और स्वीकार किया है। उन्‍हें, हे मेरे स्वामी, अपनी उदारता के हस्त से अपनी शाश्वत जलधाराएँ पीने को दे और तब उनके लिये वह पुरस्कार लिख जो तेरी निकटता के महासिंधु में निमग्न होने वालों के लिये और तुझसे मिलन की दिव्य मदिरा को प्राप्त करने वालों के लिये नियत किया गया है। मैं तुझसे याचना करता हूँ, हे राजाधिराज! कि उनके लिये इहलोक तथा परलोक का शुभ-मंगल विधान कर और उनके लिये वह अंकित कर जो तेरा कोई भी प्राणी नहीं खोज पाया है और उनकी गणना ऐसे लोगों के साथ कर जिन्होंने तेरे चतुर्दिक परिक्रमा की है और जो तेरे लोकों में से प्रत्येक लोक में, तेरे सिहांसन की परिधि की परिक्रमा करते हैं। 
तू सत्य ही, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञाता, सर्वसूचित है।

-Bahá'u'lláh
-----------------------

